पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं? टाइगर सफारी, सही समय और ट्रिप प्लान की पूरी जानकारी

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  अगर आप पहली बार रणथंभौर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके मन में कई सवाल होंगे—रणथंभौर कब जाना चाहिए, कितने दिन रुकना सही रहेगा, टाइगर सफारी कैसे बुक करें, एक सफारी काफी है या दो करनी चाहिए और सबसे बड़ा सवाल, क्या रणथंभौर में बाघ जरूर दिखाई देता है? इन सवालों के जवाब जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि रणथंभौर की यात्रा किसी सामान्य sightseeing trip जैसी नहीं है। यहां आपका अनुभव मौसम, सफारी के समय, जंगल की परिस्थितियों और थोड़े से भाग्य पर भी निर्भर करता है। मेरी नजर में रणथंभौर को सिर्फ “बाघ देखने की जगह” समझना सबसे बड़ी गलती होगी। सवाई माधोपुर के पास स्थित यह इलाका जंगल, झीलों, पहाड़ियों, वन्यजीवों और ऐतिहासिक रणथंभौर किले का ऐसा मेल है, जहां एक ही यात्रा में आपको प्रकृति और इतिहास दोनों को करीब से देखने का मौका मिलता है। अगर आप अपनी पहली यात्रा को थोड़ा सोच-समझकर प्लान करते हैं, तो सिर्फ एक सफारी के बजाय पूरा रणथंभौर अनुभव करना ज्यादा यादगार हो सकता है। पहली बार रणथंभौर जाने के लिए कितने दिन काफी हैं? अगर आप पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं, तो 2 रात और 3 दिन का trip एक अच्छा विकल्...

चोखी ढाणी जयपुर की एक पहचान


किसी भी यात्रा को हम तक ही आकर खत्म होना चहिये , पर सब जगह एक जैसी नहीं होती कुछ आपको अपने पास बुला लेती है। वैसे तो मै जयपुर में काफी समय रही हूं क्योंकि मैंने बारहवी के बाद की शिक्षा  जयपुर से पूरी की थी। जयपुर बेहद ही खूबसूरत जगह है मैं अपने हिसाब से बोलू तो मेरा दूसरा घर।जहा मुझे कभी नहीं लगा के मैं यहां सिर्फ अप शिक्षा के लिए आए हूं। हमेशा यहां मैंने एक अपनापन पाया। और काफी कुछ सीखने को भी मिला मुझे, 4-5 सालो में मैंने जयपुर के काफी जगह गई जैसे आमेर,जयगढ़, हवा महल,अल्बर्ट हॉल म्यूजियम, नाहरगढ़, पर इतनी जगह देखने के बाद भी मुझे हमेशा यही लगा के की कुछ छूट रहा हैै, जयपुर टोंक रोड पे एक रिसोर्ट जिसका नाम है "चोखी ढाणी "

jaipur से यही कोई पन्द्रह-बीस किलोमीटर दूर चोखी ढाणी स्थित है। मैंने काफी प्रशंसा सुनी थी चोखी ढाणी की। पर कभी जा नहीं पाई। लेकिन ये बेहतरीन अवसर मुझे मिल ही गया। और वो भी अपने ऑफिस की अोर से। मैं बेहद खुश हुई सुन के कि हम कुछ कलीग्स को ऑफिस की ओर से चोखी ढाणी की टिकट दी जाने वाली हैं। क्यों की हमारे ऑफिस से हर माह कुछ employee को best workers का पुरस्कार दिया जाता था। जिनमे मैं भी शामिल थी।. फिर क्या मेरी खुशी और भी दुगनी हो गई ये सुन कर। मुझे और मेरे कुछ कलीग्स को पास मिला और हम सभी काफी उत्सुकता से निकाल पड़े चोखी ढाणी की ओर। जो भी पर्यटक जयपुर शहर की यात्रा करने आते है वो लोग चोखी ढाणी जाने की चाह जरुर रखते हैं। अगर आप भी चोखी ढाणी जाना चाहते हैं या इसके बारे में जानना चाहते हैं तो इस लेख को जरुर पढ़ें, चोखी ढाणी का मतलब होता है "अच्छा गाँव". चोखी ढाणी जयपुर शहर के बीच में 1989 में बनाया गया एक गाँव का मॉडल जो की दस एकड़ में फैला है यहाँ आपको मिलेंगे राजस्थान के अलग अलग इलाको के लोक नृत्य , जिसमे की कालबेलिया नाच सबसे अधिक प्रसिद्ध है इसके अलावा कठपुतली का खेल , कंचे का खेल , इला अरुण, के गीतों पे थिरकते युवक - युवतिया भी यहां देखने को मिलेंगे।


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